सूखे दरख्तों पर अब फूल नहीं खिलता, जो हो जाए जुदा वो फिर नहीं मिलता। अँधेरे मे अब निकलना पड़ता है गली से, चौखट पर अब किसी के दीपक नहीं जलता। ये भीड़ से भरी दुनिया सिर्फ दिखावा है , मसरूफियत इतनी कि कोई खुद से नहीं मिलता। हर शख्स कि जुबां पर अंग्रेजियत का फितूर है, अब तो दादा भी पोते से हिंदी नहीं बोलता। किसी और से तो गिला करना भी फिजूल है सचिन , कोई तुम्हारा अपना भी तो तुम्हारा जिक्र नहीं करता।
Posts
था ये वहम की तुझे अपना बनाएंगे
- Get link
- X
- Other Apps
था ये वहम की तुझे अपना बनाएंगे ,तुझे सपना बनाएंगे , वो रात ना रही वो बात ना रही तेरी पलकें सजायेंगे । आँखों से बहते दरिया को अब नई राह दिखाएंगे ,, चेहरा है आफताब तेरा ये अब सपना ना सजायेंगे।। था ये वहम.......... तुझपे लुटाई भावनाओं को अब नई कविता बनाएंगे , बिखरे अश्कों से अपनी मुक्कमल दुनिया बसायेंगे । तुझे संसार लिखा था मैंने आखिर क्यूँ ही लिखा था ,, बदलते दौर मे अब खुद को बदलना सिखाएंगे ।। था ये वहम.......... हर एक गुफ्तगु मे तेरे जिक्र को अब कैसे छुपायेंगे , रुक्मणि तो ना सही पर तुझे श्याम कि राधा बनाएंगे। वैसे तो सारा जहाँ मिल जाए तो क्या मिला साकी,, एक फूल ना मिला तो क्या अब पूरा गुलशन सजायेंगे।। था ये वहम .........